जशपुर, 1 अगस्त 2026।
किसी भी गांव के विकास में महिलाओं की भागीदारी सबसे अहम होती है, लेकिन जब इन्हीं महिलाओं को अपने समूह की चर्चा करने के लिए कोई सुरक्षित जगह ही न मिले, तो विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। जशपुर जिले के केरसई गांव की महिलाओं के लिए भी यह एक बड़ी और पुरानी समस्या थी। लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गांव में बने ‘महतारी सदन’ ने अब इन महिलाओं की इस बरसों पुरानी परेशानी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।
यह भवन आज सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का नया केंद्र बन चुका है।
पेड़ के नीचे और घरों के आंगन में होती थीं बैठकें
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए महिला समूह की सक्रिय सदस्य श्रीमती बबीता गुप्ता बताती हैं कि पहले उनके स्वयं सहायता समूह (SHG) के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक तय और सुरक्षित बैठक स्थल की होती थी।
बबीता बताती हैं, “पहले जब भी हमें समूह की बैठक बुलानी होती थी, तो जगह खोजना सबसे मुश्किल काम होता था। कभी किसी सदस्य के घर के आंगन में तो कभी पेड़ के नीचे बैठकर हमें चर्चा करनी पड़ती थी। सबसे ज्यादा दिक्कत बरसात और भीषण गर्मी के मौसम में होती थी। कई बार खराब मौसम की वजह से बैठकें रद्द करनी पड़ती थीं, जिससे समूह का काम और हमारी बचत योजनाएं बुरी तरह प्रभावित होती थीं।”
महतारी सदन ने बदली तस्वीर, कामकाज हुआ व्यवस्थित
केरसई में ‘महतारी सदन’ के निर्माण के बाद अब पूरी तस्वीर बदल गई है। बबीता खुशी जताते हुए बताती हैं कि अब गांव की सभी महिलाएं नियमित रूप से इसी सदन में इकट्ठा होती हैं। यह उनका अपना स्थायी ठिकाना है। अब यहां शांति से बैठकर महिलाएं समूह की बचत, ऋण के लेन-देन, आजीविका बढ़ाने की नई गतिविधियों और गांव के अन्य सामाजिक विषयों पर खुलकर चर्चा करती हैं। एक तय जगह मिलने से समूह का संचालन पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और असरदार हो गया है।
मुख्यमंत्री का जताया हृदय से आभार
महतारी सदन जैसी बड़ी सौगात मिलने पर बबीता गुप्ता और समूह की अन्य महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इस एक कदम ने महिलाओं को इधर-उधर भटकने की मजबूरी से मुक्ति दिला दी है। अब उनके सभी काम बिना किसी रुकावट के पूरे हो रहे हैं।
केरसई का यह ‘महतारी सदन’ इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर महिलाओं को सही संसाधन और सुरक्षित माहौल दिया जाए, तो वे किसी भी गांव की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को पूरी तरह से बदल सकती हैं।
