रक्षाबंधन पर ‘विष्णु भैया’ का बहनों को बड़ा तोहफा: ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का शुभारंभ, 50 महिलाओं को सौंपी ई-रिक्शा की चाबी

जशपुर। रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बगिया कैम्प कार्यालय में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का शुभारंभ किया। इस विशेष मौके पर मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 50 बहनों को ई-रिक्शा की चाबियां सौंपीं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

कार्यक्रम के दौरान स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने भी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें साड़ी और मिठाई उपहार स्वरूप भेंट की।

पिछले रक्षाबंधन पर 14, इस बार 50 बहनों को मिला रोजगार का साधन

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता ही सशक्त परिवार और समृद्ध समाज का आधार है:

  • विस्तार लेती योजना: पिछले रक्षाबंधन पर 14 महिलाओं को ई-रिक्शा दिए गए थे, जिसे इस वर्ष बढ़ाकर 50 बहनों तक पहुंचाया गया है। राजधानी रायपुर में भी 92 महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं।
  • सम्मानजनक आमदनी: ई-रिक्शा संचालन से बहनें प्रतिमाह लगभग ₹15,000 तक की नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की माली हालत मजबूत हो रही है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में मदद मिल रही है।
  • उद्यमिता को बढ़ावा: मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी बहनें अब केवल किराना या सब्जी व्यवसाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ई-रिक्शा और तकनीकी क्षेत्रों में भी आगे आ रही हैं। सरकार मुद्रा ऋण और जरूरी प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को सतत स्वरोजगार से जोड़ रही है।

बगिया में ₹3 करोड़ की लागत से बनने वाले विश्राम गृह का भूमिपूजन

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बगिया क्षेत्र को महत्वपूर्ण अधोसंरचना विकास की सौगात भी दी। उन्होंने लगभग ₹3 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाले बगिया विश्राम गृह का विधिवत भूमिपूजन किया। इसके साथ ही बगिया में यादव मोहल्ला तक सीसी सड़क निर्माण कार्य का भी शिलान्यास किया गया।

कार्यक्रम में कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित रहीं।

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