रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में लागू की जा रही आधुनिक तकनीकों और डिजिटल सेवाओं के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं । राज्य में स्मार्ट मीटर की स्थापना और ‘मोर बिजली’ मोबाइल ऐप के संयोजन ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली प्रबंधन को पूरी तरह से पारदर्शी, सुलभ और तकनीक-आधारित बना दिया है।
इसी क्रम में बालोद जिले के ग्राम पंचायत ओरमा से एक उत्साहजनक उदाहरण सामने आया है, जहाँ स्मार्ट मीटर लगने के बाद ग्रामीणों के बिजली उपयोग और खर्च करने के तौर-तरीकों में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। अब ग्रामीण प्रतिदिन अपने स्मार्टफोन पर बिजली खपत की सटीक जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, जिससे ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग बढ़ा है और उनके मासिक बिजली बिलों में 50% तक की भारी गिरावट आई है।
दैनिक निगरानी से नियंत्रित हुई खपत, ₹1200 से घटकर ₹600 हुआ बिल
ग्राम पंचायत ओरमा की सरपंच श्रीमती मंजूलता साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले पारंपरिक व्यवस्था में बिजली की वास्तविक खपत का अनुमान लगाना काफी कठिन होता था। महीने के अंत में आने वाले बिलों को लेकर अक्सर अनिश्चितता बनी रहती थी, लेकिन स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप ने इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया है।
“अब हम प्रतिदिन अपने घर की बिजली खपत मोबाइल पर देख पाते हैं और उसी के अनुसार पंखे, कूलर व अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग नियंत्रित करते हैं। गर्मी के मौसम में अधिक उपयोग के कारण मेरा बिजली बिल लगभग ₹1,200 आया था। लेकिन ऐप के माध्यम से नियमित निगरानी और ऊर्जा के संतुलित उपयोग के चलते पिछले महीने मेरा बिल घटकर आधा यानी मात्र ₹600 रह गया।” > — श्रीमती मंजूलता साहू (सरपंच, ग्राम पंचायत ओरमा)
सरपंच श्रीमती साहू ने अन्य उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर लगने के बाद ‘मोर बिजली’ ऐप का अनिवार्य रूप से उपयोग करें, ताकि समय पर संभावित बिल और ऊर्जा बचत की सटीक जानकारी मिल सके।
एक क्लिक पर घर और दुकान दोनों की निगरानी, भुगतान भी हुआ आसान
गांव के किसान श्री नंदकुमार साहू ने बताया कि उनके निवास और व्यावसायिक दुकान दोनों स्थानों पर स्मार्ट मीटर स्थापित किए गए हैं। ‘मोर बिजली’ ऐप की बदौलत वे एक ही स्थान पर बैठकर दोनों परिसरों की दैनिक बिजली खपत पर नजर रख पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब बिल जमा करने के लिए बिजली कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। घर बैठे ही ‘मोर बिजली’ ऐप के जरिए सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान संभव हो गया है, जिससे ग्रामीणों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है।
पारदर्शिता से बढ़ी ऊर्जा संरक्षण की आदत
इसी प्रकार ग्राम ओरमा की निवासी कमलेश्वरी साहू और पेमिन साहू ने भी इस डिजिटल पहल की सराहना की। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर के आने से पूरी बिलिंग प्रणाली पारदर्शी हो गई है। ऐप पर रोजाना मिलने वाले खपत अपडेट्स से परिवार के सदस्यों में ऊर्जा संरक्षण को लेकर जिम्मेदारी की भावना बढ़ी है, जिसके सुखद परिणाम स्वरूप बिजली बिलों में निरंतर कमी दर्ज की जा रही है।
समाज, सरकार और संवाद का जीवंत उदाहरण
ग्राम ओरमा का यह अनुभव इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब सरकारी नीतियां और आधुनिक तकनीक पारदर्शी संवाद के माध्यम से जन-जन तक पहुँचती हैं, तो उसका सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है । स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप केवल एक तकनीकी उपकरण मात्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और नागरिकों में नागरिक जवाबदेही (Civic Accountability) को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं ।
