रायपुर, 6 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम जनमन) आवास योजना प्रदेश के जरूरतमंद और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से अनेक परिवारों का सुरक्षित और सम्मानजनक आवास का सपना साकार हो रहा है। महासमुंद जिले की कुमारी बाई कमार की कहानी भी इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है।
महासमुंद विकासखंड की ग्राम पंचायत डुमरपाली के आश्रित ग्राम रामपुर निवासी 35 वर्षीय कुमारी बाई कमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा। विवाह के कुछ समय बाद ही उनके पति का असामयिक निधन हो गया, जिसके बाद दो छोटे बच्चों के पालन-पोषण और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कुमारी बाई बांस से घरेलू उपयोग की सामग्री बनाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं। सीमित आय के बीच दो वक्त की रोटी का इंतजाम तो हो जाता था, लेकिन रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं था। जंगल से लगे क्षेत्र में बने कच्चे मकान में हर रात जंगली जानवरों का भय बना रहता था और बारिश तथा अन्य मौसम की चुनौतियां अलग थीं।
इसी दौरान उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना की जानकारी मिली। पात्रता के आधार पर उनका चयन योजना में हुआ और उन्हें पक्का आवास स्वीकृत किया गया। आज कुमारी बाई अपने दोनों बच्चों के साथ नए पक्के घर में सुरक्षित, सम्मानजनक और निश्चिंत जीवन व्यतीत कर रही हैं।
कुमारी बाई बताती हैं कि अब उन्हें बारिश, आंधी या जंगली जानवरों के डर के बीच जीवन नहीं बिताना पड़ता। उनके अनुसार इस योजना ने केवल एक मकान ही नहीं दिया, बल्कि उनके परिवार को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद भी दी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है और अब उनका परिवार पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी रहा है।
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराकर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अनेक जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर का सपना साकार हो रहा है।
