नागलोक तपकरा में बनेगा अत्याधुनिक ‘सर्प ज्ञान केंद्र’: PCCF और विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय बैठक में सर्प संरक्षण, शोध व सर्प मित्रों के प्रशिक्षण पर बना रोडमैप

तपकरा रेस्ट हाउस में वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों का मंथन; अंधविश्वास मिटाने, मानव-सर्प संघर्ष रोकने और वैज्ञानिक रेस्क्यू के लिए तैयार होगी विस्तृत कार्ययोजना।

तपकरा (जशपुर), 15 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ के ‘नागलोक’ के नाम से विख्यात जशपुर जिले के तपकरा में प्रस्तावित सर्प ज्ञान केंद्र (Snake Knowledge Centre Tapkara) को धरातल पर उतारने की दिशा में वन विभाग ने बड़ी पहल की है। तपकरा स्थित नागलोक रेस्ट हाउस में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सर्प विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सर्प संरक्षण (Snake Conservation), वैज्ञानिक अनुसंधान, जन-जागरूकता तथा मानव-सर्प संघर्ष (Human-Snake Conflict) को न्यूनतम करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना रहा।

बैठक में छत्तीसगढ़ वन विभाग के प्रमुख एवं पीसीसीएफ (PCCF & Head of Forest Force) अरुण कुमार पाण्डेय (IFS), सरगुजा मुख्य वन संरक्षक (CCF) दिलराज प्रभाकर, जशपुर वनमंडलाधिकारी (DFO) शशि कुमार, डॉ. अजय कुमार शर्मा तथा सर्प विशेषज्ञ आयुष मान शर्मा (Aayush Maan Sharma) सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

वैज्ञानिक अनुसंधान और जन-जागरूकता का प्रमुख केंद्र बनेगा तपकरा

बैठक में तपकरा को जैव विविधता (Biodiversity) और सर्प अध्ययन के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तार से मंथन हुआ:

  • अंधविश्वास का खात्मा: समाज में सांपों को लेकर फैली भ्रांतियों, मिथकों और अंधविश्वास को वैज्ञानिक तथ्यों एवं सटीक जानकारी के जरिए दूर किया जाएगा।
  • शैक्षणिक गतिविधियां: स्कूली विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी, ताकि युवा पीढ़ी पर्यावरण संतुलन में सांपों की भूमिका को समझ सके।
  • पारिस्थितिकी संतुलन: वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जैव विविधता को बचाए रखने के लिए सर्पों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

सर्प मित्रों (Snake Rescuers) को मिलेगा आधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण

ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में सांप निकलने की स्थिति में जान-माल की सुरक्षा के लिए ‘सर्प मित्रों’ की भूमिका सबसे अहम होती है। बैठक में निर्णय लिया गया कि स्थानीय सर्प मित्रों को विशेष व मानक प्रशिक्षण (Standard Rescue Protocol) दिया जाएगा:

  • प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु: विषैले व गैर-विषैले सर्पों की सटीक पहचान, आधुनिक रेस्क्यू टूल्स का सुरक्षित इस्तेमाल, प्राथमिक उपचार और वन विभाग के साथ त्वरित तालमेल।
  • सुरक्षा व मानक प्रक्रिया: रेस्क्यू के दौरान मानवीय सुरक्षा के साथ-साथ सांपों को बिना चोट पहुंचाए सुरक्षित प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ने की तकनीक सिखाई जाएगी।

‘सर्पों से बचें एवं सर्पों को बचाएं’ का मूल मंत्र

चर्चा के दौरान सर्प विशेषज्ञ आयुष मान शर्मा ने स्थानीय स्तर पर शोध, डेटा संग्रह और फील्ड प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की। वन अधिकारियों ने कहा कि इस पूरी पहल का मूल मंत्र “सर्पों से बचें एवं सर्पों को बचाएं” है—यानी मानव सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वन्यजीव संरक्षण के प्रति समाज में संवेदनशील और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना।

तपकरा में प्रस्तावित यह ‘सर्प ज्ञान केंद्र’ भविष्य में छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य भारत में हर्पेटोलॉजी (सरीसृप विज्ञान) और सामुदायिक वन्यजीव प्रबंधन का एक अनुकरणीय मॉडल साबित होगा।

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