रायपुर। सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल मंत्रालय के कमरों में बैठकर नीतियां बनाना नहीं, बल्कि ऐसा तंत्र विकसित करना है जो लोक-केंद्रित, पारदर्शी और अंतिम व्यक्ति की आवाज को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाला हो। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित ‘सुशासन तिहार’ ने यह साबित कर दिया है कि जब प्रशासन स्वयं जनता की चौखट पर पहुंचता है, तो सरकारी व्यवस्थाओं के प्रति जनविश्वास किस तरह प्रगाढ़ होता है।
अब बस्तर का आयतु हो, सरगुजा का तिहारू या धमतरी के नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार—वे बिना किसी झिझक के सीधे प्रदेश के मुखिया के सामने खड़े होकर पीडीएस राशन, हैंडपंप, बिजली या स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत साझा कर सकते हैं।
चौपालों में जनता से सीधा संवाद, मौके पर ही निराकरण
मई से जून 2026 के दौरान संचालित सुशासन तिहार के तहत प्रदेश भर में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर विशेष शिविर लगाए गए। जेठ की तपती दोपहरी में जब मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर सुदूर गांवों में उतरा, तो ग्रामीणों ने अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर अपनी सार्वजनिक जरूरतें बेबाकी से रखीं:
- त्वरित स्वीकृति: हैंडपंप, तालाब घाट निर्माण, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, पहुंच मार्ग और बिजली लाइन विस्तार की सार्वजनिक मांगों को मौके पर ही स्वीकृति दी गई।
- अधिकारियों की रात्रि चौपाल: प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों की 11,693 ग्राम पंचायतों के करीब 19,820 गांवों में प्रशासनिक दलों ने पैदल भ्रमण किया और रात्रि विश्राम कर ग्रामीणों की समस्याओं को दर्ज किया।
राशन से लेकर राजस्व तक: योजनाओं का गहन मूल्यांकन
सुशासन तिहार केवल शिकायतों का संकलन नहीं, बल्कि जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी समीक्षा का सशक्त माध्यम बना:
- खाद्य सुरक्षा: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), अंत्योदय अन्न योजना, दुर्गम इलाकों में मानसून पूर्व खाद्यान्न भंडारण और बीपीएल परिवारों को अमृत नमक वितरण की स्थिति की पड़ताल की गई।
- राजस्व एवं मजदूरी: मनरेगा श्रमिकों के मजदूरी भुगतान, अविवादित नामांतरण, खाता बंटवारा और सीमांकन जैसे लंबे समय से अटके राजस्व मामलों का त्वरित निपटारा हुआ।
- बुनियादी सुविधाएं व सामाजिक सुरक्षा: पेयजल स्रोतों की सफाई, ट्रांसफार्मर रख-रखाव, कृषि पंप विद्युतीकरण, एकल बत्ती कनेक्शन सहित वृद्धावस्था, निराश्रित पेंशन और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी रिपोर्ट तैयार की गई।
सुशासन तिहार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन अब फाइलों में नहीं, बल्कि जनता की चौपालों और उनके सुख-दुख में मौजूद है।
